असम के तेजपुर से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद चीन सीमा के पास से लापता हुए भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 का मलबा मिला है. इस विमान पर दो पायलट सवार थे और हादसे वाली जगह पर किसी के जीवित बचने के निशान नहीं मिले हैं.

यह लड़ाकू विमान मंगलवार सुबह करीब 9.30 बजे नियमित ट्रेनिंग के उड़ा पर था और करीब 11.30 बजे तेजपुर से 60 किलोमीटर उत्तर में चीन सीमा के पास स्थित अरुणाचल प्रदेश के दोउलसांग के पास रडार से इसका संपर्क टूट गया. करीब 72 घंटों की तलाश के बाद विमान का मलबा उस जगह के पास ही मिला है, जहां से विमान का संपर्क टूटा था. यह जंगली इलाका है और यह तक पहुंचना काफी मुश्किल है.

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7 साल में 7 हादसे
रूस से खरीदा गया सुखोई विमान वायुसेना की अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों में से हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात साल में 7 सुखोई विमान हादसे का शिकार हो चुके हैं. करीब 358 करोड़ रुपये की लागत वाला यह विमान 4.5 जेनरेशन का विमान है और इस समय दुनिया के श्रेष्ठ लड़ाकू विमानों की श्रेणी में शामिल है.

सुखोई विमान की खासियतें
दो-इंजन वाले सुखोई-30 एयरक्राफ्ट का निर्माण रूसी की कंपनी सुखोई एविएशन कॉरपोरेशन ने किया है. भारत की रक्षा जरूरतों के लिहाज से सुखोई विमान काफी अहम है. यह सभी मौसमों में उड़ान भर सकता है. हवा से हवा में, हवा से सतह पर मार करने में सक्षम है.

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