इस बार शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर अर्थात कल से शुरू होने जा रहा है। शीतकालीन सत्र को सुचारु रुप से चलने के लिए और बहुत रुके हुए कार्यो को करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विपक्ष से सहयोग मांगा है।
दूसरी तरफ कांग्रेस भाजपा से अनेक मुद्दों को लेकर नाराज़ है।गुजरात विधानसभा के चुनाव के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर की गई टिप्पड़ियों से कांग्रेस कुनबा बहुत ही नाखुश है ।
प्रधानमंत्री मोदी ने सत्र की पूर्व संध्या पर बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते हुए इस अवसर पर कहे की लोकसभा एवं राज्य विधानसभा चुनावों को एक साथ करवाने की जरूरत पर बल दिया जाना चाहिए ताकि पांच साल में एक बार चुनाव करवाने से विकास को गति मिल सके।
 कांग्रेस पहले से ही जीएसटी एवं नोटबंदी को लागू करने के फैसले को जल्दबाजी में लिया गया कदम बताती चली आई है।इस बार संभावना है कि इस सत्र में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा नोटबंदी को लेकर कांग्रेस केंद्र सरकार पर जबरदस्त हमला करने के मिज़ाज़ में होगी।
इस बार देर से शुरू हुई शीतकालीन सत्र में बहुत ही  गहमागहमी होने के संकेत है ।गौरतलब है कि शीतकालीन सत्र में ही गुजरात विधानसभा के चुनाव परिणाम जो केंद्र सरकार के कार्य परिणामों पर और सत्र के सुचारू रूप से चलने पर गहरा प्रभाव डालेगी।

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