जासूसी के आरोप में पाकिस्तानी जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर रोक लग गयी है. अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने जाधव की फांसी के सजा की तामील पर रोक लगा दी है. भारत की अपील पर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने यह रोक लगायी है. गौरतलब है कि पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप में कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुनाई है.

अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने भारत के तरफ से पैरवी की. भारत ने जाधव की फांसी की सजा के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में अपील की थी. गत 10 अप्रैल को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव को फांसी की सजा सुनाई थी.

इसके बाद सुषमा स्वराज ने कुलभूषण की माँ और पत्नी से बात करके उनको बताया की कुलभूषण की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है. सुषमा ने ट्वीट कर कहा, ‘मैंने इंटरनेशनल कोर्ट के आदेश के बारे में खुद कुलभूषण जाधव की मां को बताया है.’ अपने अगले ट्वीट में सुषमा ने कहा, ‘इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के समक्ष कुलभूषण जाधव केस में भारत का पक्ष सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे रख रहे हैं.’

गौरतलब है कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुनाई थी. कुलभूषण जाधव अभी पाकिस्तान की जेल में बंद हैं. अब पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव को तब तक फांसी नहीं दी जा सकती है जब तक कि इंटरनेशनल कोर्ट इस पर कोई फैसला नहीं कर लेता है.

गौरतलब है कि भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट में इस मसले को बेहद गंभीरता और ठोस प्रमाणों के साथ उठाया. भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट में कहा कि फांसी के खिलाफ अपील करने के लिए बहुत कम समय है और पाकिस्तान में सभी विकल्प पर विचार करने के लिए समय भी नहीं है.

इस फैसले को भारत सरकार की बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है. इस फैसले के बाद कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में कानूनी मदद भी मिल सकेगी. बता दें कि जाधव की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तानी सेना ने उसका एक ‘‘कबूलनामा वीडियो’’ भी जारी किया था. बहरहाल, पाकिस्तान के दावे को खारिज करते हुए भारत अपनी इस बात पर कायम है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने जाधव का अपहरण किया था. हालांकि भारत ने यह माना था कि जाधव नौसेना में कार्यरत था लेकिन इस बात से साफ इनकार किया कि उसका सरकार से कोई संपर्क था.

भारत ने कहा कि जाधव को फांसी सुनियोजित हत्या होगी
पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने गत 10 अप्रैल को जाधव को ‘जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों’ में दोषी पाये जाने के बाद उसे मौत की सजा सुना दी जिस पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. भारत ने कहा कि पाकिस्तान यदि मौत की सजा की तामील करता है तो यह सुनियोजित हत्या होगी. विदेश मंत्रालय ने सोमवार को पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर उन्हें ‘डिमार्शे’ दिया जिसमें कहा गया है कि जिस कार्यवाही के आधार पर जाधव को यह सजा दी गई है वह ‘हास्यास्पद’है और उनके खिलाफ कोई ‘विश्वसनीय साक्ष्य’नहीं हैं.

अजीज ने कहा था कि जाधव के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं
दिलचस्प बात यह है कि विदेशी मामलों पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज ने कथित तौर पर सात दिसंबर को पाकिस्तान की सीनेट को बताया था कि जाधव पर ‘डोजियर’ महज ‘बयान’हैं और इसमें कोई भी ‘निर्णायक साक्ष्य’नहीं हैं. यहां तक कि उन्होंने कहा था कि सामग्री ‘अपर्याप्त’हैं और ‘अब यह संबद्ध अधिकारियों पर निर्भर करता है कि एजेंट के बारे में और जानकारी वह हमें कितने समय में देंगे.’ जाधव को कथित तौर पर ईरान से प्रवेश करने के बाद पिछले वर्ष तीन मार्च को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अशांत बलुचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था. पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि जाधव रॉ में तैनात भारतीय नौसेना का ‘सेवारत अधिकारी है’.

पाकिस्तान ने जाधव के ‘कबूलनामे’ का वीडियो जारी किया था
जाधव की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान की सेना ने उनके ‘कबूलनामे’का वीडियो जारी किया था. भारत ने यह स्वीकार किया था कि जाधव नौसेना में काम कर चुके थे लेकिन सरकार के साथ उनके किसी भी तरह के संपर्क से इनकार किया था. भारत ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से पिछले साल 25 मार्च, 30 मार्च, छह मई, 10 जून, 11 जुलाई और 19 दिसंबर को वाणिज्य दूतावास के जरिए जाधव से संपर्क करने की अनुमति मांगी थी.

जाधव तक पहुंच देने की मांग करते हुए दो फरवरी को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की पोलिटिकल विंग और काउंसलर विंग को दो अलग-अलग अनुरोध भेजे थे. सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को तीन फरवरी को डिमार्शे जारी किया था.

जाधव की मौत की सजा पर बाजवा ने मुहर लगायी
कोर्ट मार्शल में भारतीय नौसेना के 46 वर्षीय पूर्व अधिकारी की मौत की सजा पर पाकिस्तानी सेना के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने भी मुहर लगा दी और माना जा रहा है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों द्वारा पिछले साल पठानकोट और उरी पर किये गये हमलों से पहले ही तनावपूर्ण चल रहे दोनों देशों के रिश्तों में इस कदम से और कड़वाहट आयेगी.

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