‘ऑपरेशन हुर्रियत’ के बाद अब अलगाववादियों के खजाने की हकीकत खुल रही है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और हरियाणा के सोनीपत में दिन भर छापेमारी की. कार्रवाई के निशाने पर अलगाववादियों के फाइनेंसरों के करीब 26 कारोबारी ठिकाने, दफ्तर और अलगाववादी नेताओं के दफ्तर थे.

छापों में क्या मिला?
छापों में करीब ढाई करोड़ कैश बरामद होने की खबर है. इसके अलावा करीब चालीस लाख की ज्वैलरी, सिक्के और जायदाद के दस्तावेज भी मिले हैं. तलाशी के दौरान एनआईए अधिकारियों को लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसी आतंकी संगठनों के लेटरहेड मिले हैं.

जांच अधिकारियों ने कई पेन ड्राइव, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज भी जब्त किये हैं. जिन हुर्रियत नेताओं के खिलाफ कार्रवाई हुई है उनमें नईम खान, बिट्टा कराटे, जावेद गाजी बाबा शामिल हैं. छापेमारी के दौरान मिले बैंक खातों और लॉकर्सको सील कर दिया गया है. संबद्ध लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है.

हुर्रियत की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, हुर्रियत नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, यासीन मलिक और मीरवाइज उमर फारुक ने एनआईए के छापों के खिलाफ साझा बयान जारी किया है. बयान में इस कार्रवाई को ‘दबाव बनाने के मकसद झूठा बताया गया है. बयान के मुताबिक ‘ये कार्रवाई केंद्र की खीझ का नतीजा है. लेकिन हुर्रियत के नेता अपने मकसद के लिए काम करते रहेंगे.’

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NIA के सामने अलगाववादी नेताओं का कबूलनामा
इससे पहले घाटी के अलगाववादी नेता फारूक अहमद डार उर्फ ‘बिट्टा कराटे’, जावेद अहमद बाबा उर्फ ‘गाजी’ और नईम खान ने NIA के सामने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया था. सूत्रों के मुताबिक सैय्यद अली शाह गिलानी को नियमित रूप से पैसे मिलते थे. अलगाववादी नेता को पाकिस्तान से अलग-अलग चैनल से पैसे मिलते थे. जिसमें हवाला और क्रॉस बॉर्डर ट्रेड से मुख्य तौर पर पैसा मिलता था.

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क्या था ऑपरेशन हुर्रियत?
इंडिया टुडे ने स्टिंग ऑपरेशन हुर्रियत कर कश्मीर में पत्थरबाजी और अशांति के लिए पाकिस्तानी फंडिंग का खुलासा किया था. इसमें पहली बार कैमरे पर अलगाववादी नेता पाकिस्तान से पैसे लेकर घाटी में माहौल खराब करने की बात कबूलते दिखे. इसके बाद केंद्र सरकार ने एनआईए को इसकी जांच सौंप दी.

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