देश का अगला राष्ट्रपति इस साल जुलाई में चुना जाना है. जहां एक ओर सरकार अपने उम्मीदवार पर फिलहाल पत्ते नहीं खोल रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष अपनी तैयारी में लगा है.

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खुद इस मुहिम की अगुवाई कर रही हैं. वो इस सिलसिले में कई विपक्षी नेताओं से मिल रही हैं. बताया जा रहा है कि कांग्रेस जेडीयू नेता शरद यादव को उम्मीदवार बनाने के पक्ष में है. पिछले दिनों सोनिया गांधी और शरद यादव के बीच मुलाकात के बाद ये अटकलें और तेज हुई हैं.

‘विपक्ष में एकता बनाने की कोशिश’
आजतक के साथ खास बातचीत में शरद यादव ने अपनी उम्मीदवारी पर खुलकर कुछ नहीं कहा. उनका कहना था कि राष्ट्रपति उम्मीदवारी से ज्यादा जरूरी सवाल विपक्ष की एकता का है और जो भी नाम तय होगा उस पर सभी विपक्षी पार्टियां राजी होंगी.

यादव ने कहा कि विपक्षी पार्टियां पहले भी अलग-अलग मुद्दों पर साथ आती रही हैं और इस बार भी उनकी कोशिश विपक्ष को गोलबंद करने की है.

कौन होगा एनडीए उम्मीदवार?
दूसरी ओर, एनडीए खेमे में राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर आडवाणी से लेकर मुरली मनोहर जोशी तक के नाम के कयास लग रहे हैं. शिवसेना ने पहले मोहन भागवत को राष्ट्रपति बनाने की पैरवी की थी.

इसके कुछ दिनों बाद पार्टी सांसद संजय राउत ने एनसीपी नेता शरद पवार के नाम की वकालत की थी.

क्या है राष्ट्रपति चुनाव का समीकरण?
राष्ट्रपति चुनने के लिए जरूरी वोट से कुछ कम बीजेपी के पास हैं. पार्टी एआईएडीएमके और टीआरएस जैसे दलों के समर्थन से अपनी मर्जी के उम्मीदवार को राष्ट्रपति बना सकती है.

हालांकि शिवसेना के साथ रिश्तों में खटास इस राह में रोड़ा हो सकता है. पिछले 2 राष्ट्रपति चुनावों में शिवसेना कांग्रेस के उम्मीदवारों का समर्थन कर चुकी है.

प्रणब मुखर्जी को दूसरा मौका?
सत्ता के गलियारों में एक चर्चा ये भी है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को ही दूसरा मौका दिया जा सकता है.

लेकिन उन्होंने इस बात के संकेत दिये हैं कि वो तभी दोबारा उम्मीदवार बनेंगे अगर सभी पार्टियां उन्हें समर्थन दें और खुद पीएम मोदी उन्हें चुनने की हिमायत करें.

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