हमले की धमकियां, युद्ध का माहौल, मीडिया के ज़रिए प्रोपेगैंडा, सीमा पर सैनिकों की पत्थरबाज़ी, चीन ने डोकलाम को लेकर क्या क्या नहीं किया. लेकिन 71 दिन बाद चीन की अकड़ की जगह अक्ल ठिकाने लगी है. डोकलाम पर बात से ही बात बनी है. आग उगल रहे चीन को भारत ने कूटनीतिक तौर पर पानी पिला दिया है.

नहीं चलेगी चीन की दादागिरी
भारत से टकराव के 71 दिनों ने चीन की अकड़ निकाल दी है. ब्रिक्स सम्मेलन के हफ्ते भर पहले डोकलाम का विवाद आखिरकार हल हो गया है. दोनों देशों ने डोकलाम में टकराव की जगह से अपने अपने सैनिक हटा दिए हैं, इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत कहेंगे, क्योंकि जो चीन बात करने को तैयार नहीं था उसे बातचीत से ही हल निकालने पर भारत ने मजबूर कर दिया, सिर्फ इतना ही नहीं भारत ने चीन की आंख में आंख डालकर ये बता दिया है कि आगे से सीमा पर उसकी दादागीरी और मनमानी आसानी से चलने वाली नहीं है.

भारत ने दुनिया को भी बताया है कि एक परिपक्व देश किस तरह से बर्ताव करता है. धैर्य और अक्लमंदी के आगे धमकियां और अकड़ कभी जीत नहीं सकती. ये 71 दिन चीन को आगे से हमेशा याद रखने चाहिए.

बातचीत से ही निकला रास्ता
हाल के कुछ हफ्तों में डोकलाम में हुई घटना के संबंध में भारत और चीन के बीच कूटनीतिक बातचीत हुई. इस बातचीत के दौरान भारत अपने विचार व्यक्त करने और अपनी चिंताएं और हितों के बारे में बताना में सफल रहा. इस आधार पर डोकलाम में टकराव की जगह से सैनिकों के जल्द अलग होने पर सहमति हुई है और ये चल रही है.

ये भारत सरकार के विदेश मंत्रालय का बयान है, जिससे साफ है कि डोकलाम पर बात से ही बात बनी है. डोकलाम से सैनिक फिलहाल हटेंगे. ये भारत भी करेगा और चीन भी करेगा. रास्ता बातचीत से ही निकला है, जिसे चीन मान नहीं रहा था, ये भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत से कम नहीं है.

चीन ने माना- बात बन गई
डोकलाम मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्रालय ने भी माना है कि बात बन गई है. हालांकि चीन अपनी अकड़ में इतना आगे पहुंच चुका था कि अब उसे किसी तरह अपना सम्मान बचाना ही था. चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा है कि भारत ने सभी सैनिक और उपकरण डोकलाम से हटा लिए हैं. चीन के सैनिक डोकलाम के इलाके में पेट्रोलिंग करते रहेंगे.

चीन को उम्मीद है कि भारत ऐतिहासिक सीमा का सम्मान करेगा और चीन के साथ मिलकर एक दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करते हुए सीमा पर शांति बनाएगा. भारत के साथ मित्रतापूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाने को चीन बहुत महत्व देता है.

भारत ने बताया- परिपक्व देश का व्यवहार
बात किसी की हार, किसी की जीत की भी नहीं है. बड़ी बात ये है कि भारत ने दुनिया को दिखाया है कि एक परिपक्व देश होने का मतलब क्या होता है. बड़ी बात ये है कि चीन को पहली बार जमीन कब्ज़ा करने की चालों पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा. पहली बार चीन को पता चला कि एक ऐसा देश भी है जो दोस्त देश के हितों के लिए खड़ा होता है और धमकियों से बेहिचक लड़ता है. धमकियां देकर डरा देना इसमें तो चीन माहिर था.

तय नहीं था PM मोदी का बीजिंग जाना
डोकलाम में चीन को आखिरकार क्या शर्तें मानने पर भारत ने मजबूर कर दिया. किस तरह से भारत ने चीन के लिए सम्मान बचाने का एक रास्ता भी दिया. किस तरह से डोकलाम पर भारत ने ये भी संकेत दिया कि आगे चीन ने कुछ किया, तो फिर वही होगा. जो 71 दिन में हुआ है.

कूटनीतिक हार जीत से कहीं ज़्यादा ये अच्छी खबर चीन और भारत के रिश्तों के लिए है. क्योंकि डोकलाम में विवाद के बीच चीन में ब्रिक्स सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन जाना तय नहीं था. डोकलाम पर बात बन जाने से मोदी का चीन जाना तय दिख रहा है.

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