शनिवार को सेना ने कश्मीर के सोपोर में लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को मार गिराया। इसके साथ ही अब तक इस वर्ष सेना ने 122 आतंकियों का खात्मा कर डाला है। दिसंबर 2016 तक सेना ने घाटी में करीब 120 आतंकी मारे थे। आतंकियों के मारे जाने की आंकड़ें मे इजाफा होगा, इस बात की पूरी गारंटी है।

सेना ने घाटी से आतंकियों के सफाए के लिए डेडलाइन तय की है। इस डेडलाइन के तहत घाटी में सर्दियों के शुरू होने से पहले सेना ने सभी आतंकियों को मार गिराने और घाटी को आतंकियों से आजाद कराने का लक्ष्य तय किया है। सेना ने कश्मीर के आतंकियों के खिलाफ अब अपनी रणनीति बदल ली है।

मई में जब हिजबुल कमांडर सबजार भट को मार गया था तो उस ऑपरेशन ने साफ कर दिया था कि सेना किस तरह से कश्मीर खासतौर पर साउथ कश्मीर में मौजूद आतंकियों के खिलाफ आक्रामक हो गई है।

पिछले वर्ष जुलाई में जब हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी को मारा था, उसके बाद से ही घाटी में घुसपैठ जारी है और माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत खुद कई बार घाटी का दौरा कर चुके हैं। वर्ष 1990 के बाद से घाटी में आतंकियों को खदेड़ने के बाद सबसे बड़ा ऑपरेशन ‘ऑपरेशन क्लीन अप’ लॉन्च हो चुका है।

सेना ने मई में कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन की शुरुआत के साथ ही आतंकियों के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान शुरू किया था। इस समय घाटी में करीब 4,000 से ज्यादा सेना के जवान, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवान इस ऑपरेशन का हिस्सा हैं।

सेना ने आतंकियों की तलाश और उन्हें मारने के अपने ऑपरेशन को और गहन कर दिया है। बशीर लश्कर और अबु दुजाना का खात्मा इसका सबसे बड़ा सुबूत है। सेना ने मई में ही मोस्ट वॉटेंड आतंकियों की लिस्ट जारी की थी और इस लिस्ट में से दो नामों को सफाया हो चुका है।

सेना ने जो ऑपरेशन ऑल आउट शुरू किया उसके तहत लश्कर ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और जैश ए मोहम्मद के करीब 258 आतंकियों की एक लिस्ट तैयार की थी। ऑपरेशन ऑल आउट के तहत सेना ने सभी आतंकी गतिविधियों का एक खाका तैयार किया। इसके बाद सेना ने पूरा ऑपरेशन शुरू किया। सूत्रों पर अगर यकीन करें तो कश्मीर में सेना की सभी यूनिट्स ने इस बात का प्रण लिया है कि आतंकी इस बार की सर्दियां नहीं देख पाएंगे।

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