पार्टी कार्यकर्ताओं की मीटिंग के दौरान बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कार्यकर्ताओं को आगामी रणनीति के बारे में बताया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बीएसपी एक राजनीतिक पार्टी के साथ-साथ एक मिशनरी मूवमेन्ट भी है, जो बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के कारवां की देश में एक मात्र सशक्त राजनैतिक पार्टी है। इसने अपने राजनीतिक सफर में अब तक काफी उतार-चढ़ाव देखें हैं। परन्तु बीएसपी की असलियत यह है कि इसने ना बिकने वाला एक शक्तिशाली समाज बनाया है जो बाबा साहेब डा. अम्बेडकर व मान्यवर कांशीराम की असली इच्छा थी।

मुख्य बातें-
  1. मायावती ने बताया बीएसपी की हार का कारण
  2. जातिवादी ताकतों को बताया मूवमेंट को पीछे धकेलने वाला
  3. बीजेपी को बताया संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व जनविरोधी सोच वाली पार्टी
  4. लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश का आरोप लगाया

मायावती ने आगे कहा, यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में बीएसपी ने सत्ता की मास्टर चाबी चार-बार अपने हाथ में लेकर अपना उद्धार स्वयं करने के बाबासाहेब के सपने को जमीनी हकीकत में बदलने का काम किया है, जिससे जातिवादी ताकतों के सीने पर सांप लोटता रहता है और वे इस बीएसपी मूवमेन्ट को पीछे धकेलने के लिये हर प्रकार की साजिशें लगातार करते रहते हैं।

इसी का एक परिणाम यह है कि लगातार बेहतर वोट प्रतिशत प्राप्त करने के बावजूद भी बीएसपी 2014 के लोकसभा आमचुनाव में कोई सीट नहीं जीत पायी तथा सन् 2017 के विधान सभा आमचुनाव में अपेक्षा से काफी कम सीटें जीत पायी। यह सब जो बीएसपी व उसके नेतृत्व के खिलाफ लगातार की जा रही हैं ताकि अम्बेडकरवादी कारवां को सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने से दूर रखा जा सके। लेकिन यह स्थिति हमेशा बरकरार रहने वाली नहीं है।

इन चुनावी नतीजों का ही दुष्परिणाम है कि आज देश व उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में बीजेपी एण्ड कम्पनी की संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व जनविरोधी सोच वाली सरकारें हैं और समाज के कमजोर, उपेक्षित व शोषित वर्ग के लोगों पर हर प्रकार की जुल्म-ज्यादती, अन्याय, शोषण, भेदभाव आदि के पहाड़ टूट रहे हैं और इन लोगों की गुलामी, लाचारगी के अंधकार में दोबारा धकेलने का प्रयास लगातार किया जा रहा है तथा इनके खिलाफ लोकतान्त्रिक तरीके से आवाज उठाने पर तानाशाही रवैया अपनाकर इनकी आवाज को संसद तक में कुचला जा रहा है।

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